हिन्दू धर्म में कलावा बांधने की परम्परा है। कलावा तीन धागों से मिलकर बना हुआ होता है। आम तौर पर यह सूत से बना होता है। इसमें लाल, पीले, हरे या सफ़ेद रंग के धागे होते हैं। यह तीन धागे त्रिशक्तियों (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) के प्रतीक माने जाते हैं। हिन्दू धर्म में इसको रक्षा के लिए धारण किया जाता है। जो कोई भी विधि विधान से रक्षा सूत्र या कलावा धारण करता है, उसकी हर प्रकार के अनिष्टों से रक्षा होती है।

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कलावा धारण करने के लाभ:

1. कलावा आम तौर पर कलाई में धारण किया जाता है। अतः यह तीनों धातुओं (कफ,वात,पित्त) को संतुलित करती हैं।

2. इसको कुछ विशेष मंत्रों के साथ बांधा जाता है। अतः यह धारण करने वाले की रक्षा भी करता है।

3. अलग-अलग तरह की समस्याओं के निवारण के लिए अलग-अलग तरह के कलावे बांधे जाते हैं।

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4. हर तरह के कलावे के लिए अलग तरह का मंत्र होता है। कलावा धारण करने या बांधने की सावधानियां क्या हैं?

5. कलावा सूत का बना हुआ ही होना चाहिए। इसे मन्त्रों के साथ ही बांधना चाहिए। इसे किसी भी दिन पूजा के बाद धारण कर सकते हैं।

6. लाल, पीला और सफ़ेद रंग का बना हुआ कलावा सर्वोत्तम होता है। एक बार बांधा हुआ कलावा एक सप्ताह में बदल देना चाहिए। पुराने कलावे को वृक्ष के नीच रख देना चाहिए।