कम नहीं हो रही स्वाइन फ्लू मरीजों की संख्या

भोपाल: गर्मी का मौसम शुरु होने के बावजूद स्वाइन फ्लू मरीजों की संख्या कमी नहीं आई है। यह बीमारी दिनोदिन खतरनाक हो जा रही है। उधर हमीदिया अस्पताल में भी स्वाइन फ्लू के नमूनों की जांच फिर से शुरु हो गई है। राजधानी के निजी और सरकारी अस्पताल में भर्ती मरीजों में 21 की हालत गंभीर है। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि इनकी हालत सुधर जाएगी। दूसरे जिलों के मरीज देरी से इलाज के लिए पहुंचते हैं, जिससे उनकी हालत ज्यादा बिगड़ रही है। राजगढ़, होशंगाबाद, हरदा, विदिशा, सीहोर, रायसेन आदि जिलों में 55 मरीजों की जांच व इलाज भोपाल में किया गया है। इनमें 22 की मौत हो गई है।
यानी पॉजिटिव मरीजों में करीब 40 फीसदी की मौत हो गई है। शुक्रवार को राजधानी के अलग-अलग अस्पतालों में स्वाइन फ्लू के 31 पॉजिटिव मरीज भर्ती थे। इनमें 22 मरीज निजी अस्पतालों में थे। सिर्फ 9 मरीज ही सरकारी अस्पतालों में भर्ती थे। इसके पहले भी यही स्थिति रही है। निजी अस्पतालों में भर्ती होने वाले ज्यादातर मरीज दूसरे जिलों के हैं। राजधानी के जेपी अस्पताल में सिर्फ एक मरीज भर्ती है। हमीदिया अस्पताल में फिर से स्वाइन फ्लू की जांच शुरू हो गई है। जांच किट खत्म होने की वजह से पिछले हफ्ते हमीदिया अस्पताल में जांच नहीं हो रही थी। जांच के लिए सभी नमूने एम्स भोपाल भेजे जा रहे थे। एम्स ज्यादा नमूने पहुंचने की वजह से रिपोर्ट पेडिंग हो रही थी।
सीएमएचओ डॉ. एनयू खान के मुताबिक, शनिवार को 17 मरीजों के नमूने जांच के लिए हमीदिया भेजे गए हैं। जनवरी से अब तक भोपाल में 145 पॉजिटिव मरीज पाए गए। इनमें से 17 की मौत हो गई। अन्य जिलों के पॉजिटिव मरीजों की 55 थी जिनमें 22 मरीजों की मौत हो चुकी है। मालूम हो कि देश के 14 राज्यों में स्वाइन फ्लू से एक भी मौत इस साल नहीं हुई है। दिल्ली में 17 मार्च तक 3464 मरीज स्वाइन फ्लू से संक्रमित मिले हैं। इनमें सिर्फ 7 मरीजों की मौत हुई है। तमिलनाडु में 304 मरीजों में 2 , तेलंगाना में 922 में 13, कर्नाटका में 959 में 14 मरीजों की मौत हुई है।
पॉजिटिव मरीजों में मौत को प्रतिशत मप्र में सबसे ज्यादा है। यहां 434 मरीजों में 90 की जान जा चुकी है। इससे साफ है कि सतर्क रहें, इलाज में देरी न करें तो स्वाइन फ्लू सामान्य फ्लू की तरह ही है। पांच साल से कम उम्र के बच्चे, बुजुर्ग, किडनी व हार्ट के पुराने मरीज, कैंसर के मरीज जिनकी कीमोथैरेपी चल रही है। गर्भवती महिलाएं, डायबिटीज के मरीज, जिसके घर में किसी को स्वाइन फ्लू हुआ हो, अस्थमा व खून के कमी वाले मरीज। इस बारे में भोपाल के सीएमएचओ डॉ. एनयू खान का कहना है कि स्वाइन फ्लू भी आम फ्लू की तरह है। हाई रिस्क मरीजों को जरूर सतर्क रहने की जरूरत है। सर्दी-जुकाम होने पर इलाज में देरी नहीं करना चाहिए। कई मरीज कई दिन बाद इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।

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