कभी नहीं होंगे असफल, बस जीवन में इन 4 जगहों पर…

हमारे जीवन में बहुत सी ऐसी जगह और ऐसे काम होते हैं जहां व्यक्ति अकेला नहीं रह सकता है। इसीलिए उसे रिश्तों का सहारा लेना पड़ता है। लेकिन रिश्ते सही तरह से चलें यह बहुत ही जरुरी है। चाणक्य के अनुसार रिश्ते तभी मधुर रहते हैं जब रिश्ते में मर्यादाओं की सीमा को न लांघा जाए। चाणक्य के अनुसार जब रिश्तों में सीमाओं को पार किया जाता है तो रिश्तों में खटास आने लगती है।

ना तोड़ें ये दीवार:

ईमानदार: कोई भी संबंध तब तक नहीं चल सकता है जब तक उसमें ईमानदारी न हो। संबंध मुधर रखने की पहली शर्त ईमानदारी है। संबंधो के मामले में जब ईमानदारी का लोप होने लगता है तो संबंध बिखरने लगते हैं।

झूठ: किसी भी रिश्ते में झूठ की कोई संभावना नहीं होती है जो रिश्ते झूठ की नींव पर खड़े होते हैं उन रिश्तों की उम्र बहुत अधिक नहीं होती है। ऐसे रिश्ते जल्द खत्म हो जाते हैं।

समर्पण: किसी भी रिश्ते में जब समर्पण का भाव समाप्त हो जाता तो रिश्ता कमजोर होने लगता है क्योंकि हर रिश्ते में समर्पण की जरुरत होती है। समर्पण की भावना से रिश्ता मजबूत होता है।

सम्मान: यदि रिश्ते में एक दूसरे के प्रति सम्मान नहीं है तो वह रिश्ता अधिक दिनों तक नहीं चलता है। सम्मान देने से सम्मान प्राप्त होता है। इसलिए सम्मान कभी कम न होने दें।

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