एक-दूसरे से कोई उम्मीद नहीं, बल्कि एक-दूसरे को समझते थे कुछ ऐसा ही था स्कूल रोमांस

स्कूल रोमांस को 90s के बच्चे ही जान सकते हैं कि क्या हुआ करता था. वो लाइफ का एक हिस्सा था जिसे हम कभी नहीं भूलेंगे. स्कूल रोमांस की फीलिंग और एंजॉयमेंट अलग ही था. लड़की या लड़के का नाम सुनकर खुश होना, उसे एक नजर देखने के लिए घंटों लाइन में खड़े होना, हल्का महसूस करना, किसी बात की चिंता न करना. ऐसी कई चीजें हुआ करती थीं.

2/ 12 आज हम आपको बताने जा रहे हैं कई ऐसे किस्से जिनके बारे में पढ़कर आप खुद को इससे रिलेट कर पाएंगे और यकीन मानिए आपको खुशी होने के साथ बचपन के दिनों की याद भी आएगी. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कई ऐसे किस्से जिनके बारे में पढ़कर आप खुद को इससे रिलेट कर पाएंगे और यकीन मानिए आपको खुशी होने के साथ बचपन के दिनों की याद भी आएगी.

3/ 12 स्कूल के समय में हम जब अपने क्रश या प्यार को एक झलक देख लेते थे तो दिल को सुकून मिल जाता था और अगर बात होनी शुरू हो जाए तो सोने पर सुहागा. स्कूल के समय में हम जब अपने क्रश या प्यार को एक झलक देख लेते थे तो दिल को सुकून मिल जाता था और अगर बात होनी शुरू हो जाए तो सोने पर सुहागा.

स्कूल के समय में हम जब अपने क्रश या प्यार को एक झलक देख लेते थे तो दिल को सुकून मिल जाता था और अगर बात होनी शुरू हो जाए तो सोने पर सुहागा.

4/ 12 स्कूल के समय में हमारी पहले दोस्ती हुआ करती थी. इसके बाद सीक्रेट्स शेयर होते थे फिर जाकर फ्लर्टिंग और प्यार का इजहार हुआ करता था. स्कूल के समय में हमारी पहले दोस्ती हुआ करती थी. इसके बाद सीक्रेट्स शेयर होते थे फिर जाकर फ्लर्टिंग और प्यार का इजहार हुआ करता था.

5/ 12 प्यार बस हो जाता था बिना किसे के डर के और बिना एक-दूसरे को बोले. प्यार बस हो जाता था बिना किसे के डर के और बिना एक-दूसरे को बोले.

6/ 12 प्यार टेकनोलॉजी पर निर्भर नहीं करता था. अगले दिन सुबह होने का इंतजार रहता था जिससे हम दोबारा उसकी एक झलक देख पाएं. फोन कहां चलते थे पहले जमाने में? प्यार टेकनोलॉजी पर निर्भर नहीं करता था. अगले दिन सुबह होने का इंतजार रहता था जिससे हम दोबारा उसकी एक झलक देख पाएं. फोन कहां चलते थे पहले जमाने में?

7/ 12 जब हमें स्कूल में किसी से प्यार होता था तो ये प्यार एकदम सीक्रेट रहता था. किसी को इसके बारे में जानकारी नहीं होती थी. जब हमें स्कूल में किसी से प्यार होता था तो ये प्यार एकदम सीक्रेट रहता था. किसी को इसके बारे में जानकारी नहीं होती थी.

8/ 12 कई बार स्कूल में फंक्शन या त्योहार की वजह से छुट्टी हो जाया करती थी तो एक-दूसरे को देखने का मौका भी हाथ से चला जाता था. ऐसे में हम घर से बाहर कभी नहीं मिलते थे बल्कि नए दिन के आने का इंतजार करते थे. कई बार स्कूल में फंक्शन या त्योहार की वजह से छुट्टी हो जाया करती थी तो एक-दूसरे को देखने का मौका भी हाथ से चला जाता था. ऐसे में हम घर से बाहर कभी नहीं मिलते थे बल्कि नए दिन के आने का इंतजार करते थे.

9/ 12 एक-दूसरे से कोई उम्मीद नहीं रखते थे. बल्कि एक-दूसरे को समझते थे. एक-दूसरे से कोई उम्मीद नहीं रखते थे. बल्कि एक-दूसरे को समझते थे.

10/ 12 पहली बार एक-दूसरे के साथ बेड शेयर करना काफी पर्सनल हुआ करता था. ढिंढोरा पीटकर किसी को नहीं बताते थे कि बेड शेयर किया है. पहली बार एक-दूसरे के साथ बेड शेयर करना काफी पर्सनल हुआ करता था. ढिंढोरा पीटकर किसी को नहीं बताते थे कि बेड शेयर किया है.

11/ 12 एक को पसंद करते थे तो उसी के साथ रहते थे. किसी दूसरे पर आंख उठाकर नहीं देखते थे. एक को पसंद करते थे तो उसी के साथ रहते थे. किसी दूसरे पर आंख उठाकर नहीं देखते थे.

12/ 12 क्या आपको याद है स्कूल टाइम में किसी ने आपके लिए लव लेटर लिखा था? अगर हां तो कितनी अच्छी फीलिंग थी वो उसे याद करिए. बर्थडे पर जब एक-दूसरे को सप्राइज दिया करते थे कितना सुकून मिलता था और खुशी का ठिकाना नहीं रहता था. 

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