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उत्‍तराखंड : ऑल वेदर रोड के आड़े नहीं आएंगी ‘पहाड़ी’ चुनौतियां

देहरादून : पहाड़ों के बीच से गुजरने वाली करीब 900 किमी लंबी चार धाम ऑल वेदर रोड को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। पहाड़ों के दरकने और लगातार होने वाले भू-स्खलन से सड़क पर कोई अवरोध उत्पन्न न हो, यह बड़ी चुनौती है। इससे निपटने के लिए रॉक हीलिंग और जियो सिंथेटिक ट्रीटमेंट जैसी विश्व स्तरीय तकनीकों को अमल में लाया जा रहा है। उत्‍तराखंड : ऑल वेदर रोड के आड़े नहीं आएंगी 'पहाड़ी' चुनौतियां

मार्ग चौड़ीकरण के लिए जहां दोनों ओर पहाड़ों को काटा जा रहा है, वहीं इनके दरकने और भू-स्खलन से बचने के लिए 

पहाड़ों को मजबूत ढांचे में तब्दील किया जा रहा है। इसके लिए यहां पहली बार रॉक हीलिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। कच्चे पहाड़ों को दरकने से बचाने के लिए जियो सिंथेटिक ट्रीटमेंट देने की भी तैयारी है। ऐसे में परियोजना का निर्माण पूरा होने के बाद 889 किमी लंबी इस सड़क पर भूस्खलन की आशंका न के बराबर रहेगी। 

10,700 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली चार धाम ऑल वेदर रोड योजना का मकसद भी यही है कि इस पर सालभर निर्बाध रूप से आवागमन चलता रहे। परियोजना का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। इसे सात हिस्सों में बनाया जा रहा है, जिसका जिम्मा लोक निर्माण विभाग और बार्डर रोड ऑर्गनाइजेशन को दिया गया है। परियोजना में पेड़ कटान का काम लगभग पूरा हो चुका है और सड़क को चौड़ा करने के लिए पहाड़ कटान का कार्य चल रहा है। 

वर्तमान में इस पूरे मार्ग पर 37 लैंड स्लाइड जोन चिह्नित किए गए हैं, जहां से पहाड़ दरक रहे हैं अथवा मिट्टी नीचे गिर रही है। इसके अलावा ऐसे स्थानों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जहां कटान के बाद पहाड़ दरक रहे हैं। पहाड़ अधिक दरकें नहीं अथवा इनसे टुकड़े सड़क पर न गिरें, इसके लिए पहली बार रॉक हीलिंग तकनीक अथवा रॉक स्टिचिंग तकनीक अमल में लाई जा रही है। 

रॉक हीलिंग अथवा स्टिचिंग तकनीक: 

इसके तहत पहाड़ पर चार से आठ मीटर के गिबन बॉक्स लगाए जा रहे हैं। गिबन पत्थर भरे हुए तार के जाल होते हैं। इन्हें पहाड़ से इस प्रकार सटाकर लगाया जाता है कि कटे हुए पहाड़ से चिपकती हुई एक दीवार बनाई जा सके, जो पहाड़ को मजबूती देते हुए इन्हें दरकने से रोक सके। इसी तरह चट्टानों को चटककर गिरने से रोकने के लिए इन पर वॉयर मैश (तार का जाला) लगाया जाएगा। इन्हें रॉक बोल्ट की मदद से कसा जाता है। इसके लिए पहाड़ को काटकर इसमें सुराख भी किया जाता है। हर पहाड़ की ढाल व पत्थर के आधार पर जरूरत के हिसाब से इस तकनीक का उपयोग किया जाता है। 

ये है जियो सिंथेटिक तकनीक: 

चारधाम ऑल वेदर रोड में आने वाले कई पहाड़ भुरभुरी मिट्टी के बने हैं। इनके कटान के दौरान बड़े पैमाने पर मलबा नीचे आ रहा है। ऐसे में हल्की बरसात में भी यहां बड़े पैमाने पर भूस्खलन की आशंका है। लिहाजा, ऐसे स्थानों पर जियो सिंथेटिक तकनीक का उपयोग प्रस्तावित है। विदेश में खासी लोकप्रिय इस तकनीक में विशेष प्रकार के जाल (जियो सिंथेटिक मैश) का उपयोग कर इसे पहाड़ों पर कस दिया जाएगा। इससे पहाड़ की ऊपरी परत सुरक्षित हो जाएगी और भूक्षरण रोका जा सकेगा। 

नोडल अधिकारी (लोक निर्माण विभाग) राजेश शर्मा का कहना है कि चार धाम ऑल वेदर रोड में कई नवीनतम तकनीकों का प्रयोग किया जा रहा है। इसमें रोड हीलिंग व जियो सिंथेटिक ट्रीटमेंट जैसी तकनीक भी शामिल हैं। इनका मकसद मार्ग बनाने के दौरान कटने वाले पहाड़ों को सुरक्षित व मजबूत बनाना है, ताकि इनके दरकने अथवा टूटने की आशंका को न्यूनतम किया जा सके। 

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