कृषि अनुसंधान परिषद में भर्ती घोटाले में गिरी गाज, तीन वैज्ञानिक और नौ अफसर सहित 19 बर्खास्त

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-राघवेन्द्र प्रताप सिंह

लखनऊ. पूर्ववर्ती सरकार में मनमानी करते हुए ‘रसूखदारों’ ने नियम विरुद्ध भर्तियां कर दी। सूबे का निजाम बदला तो जांच हुई और अब उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार) के तीन वैज्ञानिकों, नौ तकनीकी अधिकारियों सहित 19 लोगों को बर्खास्त कर दिया गया है। बुधवार को इनकी बर्खास्तगी की नोटिस विभाग में चस्पा कर दी गयी। इन सभी की नियम विरूद्ध भर्ती वर्ष 2015 में पिछली सरकार में हुई थीं। यह सभी भर्तियां तत्कालीन महानिदेशक राजेंद्र कुमार यादव के कार्यकाल में हुई थीं।

उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद के तत्कालीन महानिदेशक डॉ. राजेंद्र कुमार यादव तथा उनके ‘काकस’ के अन्य अफसरों ने मिलकर विभाग में बड़ा भर्ती घोटाला किया था। यहां तक कि लोक सेवा आयोग के पदों की भर्ती भी खुद ही कर ली थी। इतना ही नहीं सब कुछ आनन-फानन में किया गया ताकि किसी को इसकी भनक तक न लग पाये और ‘घालमेल’ कर लिया जाये। ‘मास्टर माइंड’ ने भर्ती के लिए अपनी ही वेबसाइट पर विज्ञापन निकाला। फिर एक ही दिन इंटरव्यू कराया गया। उसी दिन लिखित परीक्षा हुई। तीसरे दिन ज्वाइनिंग करा दी गई। मतलब सारा खेल एक से दो दिन में ही कर दिया गया। यही नहीं जांच में सामने आया है कि सभी पदों पर अधिकारियों ने अपने ही रिश्तेदार की भर्ती भी गुपचुप तरीके से कर ली।

उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद

सूत्रों के मुताबिक महानिदेशक ने अपनी करीबी रिश्तेदार दीप्ति यादव को पीसीएस अधिकारी के वेतनमान पर कार्मिक अधिकारी नियुक्त कर दिया। यहां पहले से तैनात वैज्ञानिक अधिकारी सुजीत कुमार यादव ने अपनी पत्नी संध्या यादव को भी अधिकारी बनवा दिया। संध्या यादव की उम्र ज्यादा हो गई थी। इसके लिए ‘उपकार’ के तत्कालीन सचिव इंद्रनाथ मुखर्जी ने अपने स्तर से एक आदेश जारी कर उन्हें आयु सीमा में पांच साल छूट भी दे दी। सूत्रों ने बताया कि वरिष्ठ कंप्यूटर सहायक साधना सिंह ने अपने पति मनोज शंखवार को भी अधिकारी की नौकरी दिलवा दी। सचिवालय में तैनात एक अधिकारी के पुत्र सचिन यादव को उसी दिन नौकरी दे दी गई जिस दिन उनकी 18 साल उम्र पूरी हुई।


लेकिन साल 2017 में योगी सरकार द्वारा शासन ने तत्कालीन प्रमुख सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी हेमंत राव को इसकी जांच सौंपी। उन्होंने जांच कर 2018 में ही इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी थी। जांच में तत्कालीन महानिदेशक राजेंद्र कुमार यादव, सचिव इंद्रनाथ मुखर्जी तथा सहायक निदेशक डॉ. संजीव कुमार सहित कई अधिकारियों को भी दोषी पाया गया था। अब शासन ने भर्ती होने वाले अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया। कृषि अनुसंधान परिषद के सचिव राम सघन राम ने 19 अगस्त 2020 को नोटिस बोर्ड पर एक नोटिस भी चस्पा कर दिया है। इसमें लिखा है कि वर्ष 2014-15 में वैज्ञानिक अधिकारियों, तकनीकी सहायकों, लाइब्रेरियन, कार्मिक अधिकारियों, आशुलिपिकों तथा कनिष्ठ लिपिक के पदों की चयन प्रक्रिया को निरस्त कर दिया गया है। उक्त पदों पर किया गया चयन भी निरस्त कर दिया गया है।


विभाग में बर्खास्तगी आदेश की चस्पा नोटिस में वैज्ञानिक अधिकारी अंबरीश यादव, बलवीर सिंह, विपिन कुमार, कार्मिक अधिकारी दीप्ति यादव, तकनीकी वैज्ञानिक सहायक अश्वनी कुमार, जेपी मिश्रा, सीमा खान, अश्वनी यादव, ज्ञानमंजरी यादव, संध्या यादव, संगीता यादव तथा मनोज कुमार। लाइब्रेरियन विनय कुमार सिंह, स्टेनो आशीष यादव, सचिन यादव, नूपुर द्विवेदी तथा टाइपिस्ट आनंद कुमार यादव, राकेश कुमार तथा संजीव कुमार अग्निहोत्री के नाम हैं।

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