ईरान पर फंसा भारत, अमेरिका ने ऐसे तोड़ा अपना वादा…

यूएस राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप भले ही खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिगरी दोस्त बताते हों लेकिन अमेरिका के फैसलों से भारत की परेशानियां बढ़ रही हैं. अमेरिका के साथ बढ़ती करीबी के बीच भारतीय हितों की अनदेखी वाले ट्रंप के कदमों ने भारत को हैरत में डाल दिया है.

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ट्रंप प्रशासन ने इस सप्ताह ऐलान किया कि अब वह आगे ईरान से तेल आयात को लेकर किसी भी देश को कई छूट नहीं देगा. अमेरिका ने ईरान से तेल आयात पर प्रतिबंध लगाने के बाद भारत समेत 8 देशों को दी गई 2 मई तक की छूट को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया है.

अमेरिका के इस कदम के बाद से तेल की वैश्विक कीमतों में बढ़ोतरी होना तय माना जा रहा है जिससे सबसे ज्यादा भारतीय प्रभावित हो सकते हैं.

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पश्चिमी देशों के कई नेताओं के साथ अनबन के बीच ट्रंप कई मौकों पर पीएम मोदी के साथ अपनी दोस्ती जाहिर करते आए हैं.

कांग्रेस पार्टी ने भी ईरान प्रतिबंध पर अमेरिकी फैसले को लेकर पीएम मोदी पर हमला बोला. कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट में कहा, देश की तेल जरूरतों और सुरक्षा के मुद्दे पर मूक दर्शक बने बैठे हैं.

नाम ना छापने की शर्त पर एक भारतीय अधिकारी ने एएफपी न्यूज एजेंसी से बताया, ईरान पर अमेरिका का फैसला हैरानी भरा और निराश करने वाला था. ट्रंप प्रशासन ने मार्च महीने में एक संदेश में कहा था कि भारत की ईरान से तेल आयात में कटौती, छूट आगे बढ़ाने के लिए काफी है.

अधिकारी ने कहा, हमें लगा था कि एक प्रमुख रक्षा और रणनीतिक साझेदार होने के नाते अमेरिका हमारी चिंताओं पर विचार करेगा.

ट्रंप प्रशासन ईरान के राजस्व के प्रमुख रास्ते को बंद कर देना चाहता है ताकि ईरान को आतंक और परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे पर झुकने पर मजबूर किया जा सके.

भारत दुनिया का तीसरा सबसे तेल आयातक देश है. अधिकारी ने कहा कि भारत ने ईरान से कुल तेल आयात में करीब 17 फीसदी की कटौती की है. दूसरी तरफ, ट्रंप के वेनेजुएला से वामपंथी राष्ट्रपति निकोलस मदुरो को सत्ता से बाहर निकालने के दबाव के बीच इस देश से भी तेल खरीदारी रोक दी है.

अधिकारी ने बताया, हमने ऐसा इसलिए नहीं किया क्योंकि हम यूएस से सहमत थे बल्कि इसलिए कि हम रणनीतिक साझेदार हैं.

अधिकारी के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन के विकासशील देशों को दिए गए एक खास दर्जे (जनरल सिस्टम ऑफ प्रिफरेंसेस) को छीनने का ऐलान किया तो नई दिल्ली ने ट्रंप प्रशासन को विस्तार से एक प्रस्ताव भेजा था लेकिन उसे नजरअंदाज कर दिया गया.

 

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