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इस बड़ी वजह से अब और भी लंबा खिंच सकता है सीबीआई विवाद

देश की सर्वश्रेष्ठ जांच एजेंसी कही जाने वाली सीबीआई में टॉप बॉस और सेकेंड बॉस के बीच चल रहा विवाद अब लंबा खिंच सकता है। सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना द्वारा निदेशक आलोक वर्मा पर लगाए गए आरोपों में सीवीसी को कुछ दम नजर आ रहा है। यही वजह है कि शुक्रवार को मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने फौरी तौर से आलोक वर्मा को राहत न देते हुए सोमवार तक उनका जवाब मांगा है।इस बड़ी वजह से अब और भी लंबा खिंच सकता है सीबीआई विवाद

सूत्र बताते हैं कि वर्मा के खिलाफ अस्थाना ने जो आरोप लगाए थे, उनके अलावा डीओपीटी और सीवीसी के बीच एक नई सीडीआर रिपोर्ट भी अहम मानी जा रही है। इसमें वर्मा के चहेते अफसरों की बातचीत रिकॉर्ड है। इसे सुनने के बाद वर्मा और अस्थाना के बीच चली जंग का अंदाजा लग जाता है।

मोईन कुरैसी मामले एवं दूसरे केसों में आलोक वर्मा की भूमिका को लेकर अस्थाना ने 24 अगस्त को सीवीसी एवं कैबिनेट सचिव को जो शिकायत भेजी थी, उसमें लिखी कई बातें सीवीसी को सही लगी हैं।

सर्वविदित है कि सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। वर्मा ने मोईन कुरैसी मामले में 15 अक्तूबर को राकेश अस्थान व अन्य आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया था।इसके बाद अस्थाना ने 19 अक्तूबर को सीवीसी एवं कैबिनेट सचिव को अपने एक पत्र के द्वारा सारी स्थिति से अवगत करा दिया था।

हालांकि यह पत्र अस्थाना ने खुद के खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद लिखा था, लेकिन उनके द्वारा 24 अगस्त को भेजा गए पत्र सीवीसी को मामले की गहराई तक ले गया। इस पत्र में राकेश अस्थाना ने कई राज सार्वजनिक किए हैं। उनका आरोप था कि आलोक वर्मा किसी भी तरह से मुझे फंसाने की जुगत में हैं।

मोईन कुरैसी मामले की आड़ में वर्मा ने मेरे खिलाफ वडोदरा, सूरत और अहमदाबाद में रेड डलवाई थी। सूत्रों का कहना है कि अस्थाना के खिलाफ जांच अधिकारी डीएसपी बस्सी ने सुप्रीम कोर्ट में जो रिपोर्ट दी थी, उसमें अस्थाना और दूसरे आरोपियों के बीच बातचीत के पुख्ता प्रमाण थे। अब हाल ही में एक नई सीडीआर सामने आई है, जिसमें वर्मा के करीबी अफसरों की बातचीत रिकार्ड है। इसके साक्ष्य सीवीसी और डीओपीटी, दोनों के पास बताए जाते हैं। यह रिपोर्ट भी अब वर्मा के खिलाफ जांच आगे बढ़ाने का एक बड़ा कारण बन गई है।

मोईन कुरैसी मामले को लेकर सीबीआई में किसने किसको क्या आदेश दिया, यह सब रिकार्ड हो रहा था

केंद्र सरकार के इशारे पर एक एजेंसी ने सीबीआई में इंटरकॉम बातचीत और देश से बाहर हुई फ़ोन कॉल टेप की थी।मोईन कुरैसी मामले को लेकर सीबीआई में किसने किसको क्या आदेश दिया था, यह सब रिकार्ड भी डीओपीटी के पास मौजूद है। बता दें कि इसमें आलोक वर्मा ने कथित तौर से एसआईपी फोन पर सतीश बाबू सना की गिरफ़्तारी रोकने का जो मोखिक आदेश दिया था, वह डिटेल भी पीएमओ के पास है।

प्रधानमंत्री कार्यालय को अस्थाना और दुबई में बैठे सोमेश के बीच हुई बातचीत का ब्योरा भी मुहैया कराया गया था। दोनों ही अफसर सरकारी मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने के अलावा अन्य फोन से भी बात करते थे। खास बात है कि बातचीत के ब्योरे में आलोक वर्मा और उनके चहेते एक डीएसपी की बातचीत भी शामिल है। डीओपीटी के पास यह जानकारी भी है कि वह डीएसपी वर्मा के कमरे या आवास पर कब गया था।

जानिये अस्थाना के पत्र का राज…आलोव वर्मा पर लगाए थे ये गंभीर आरोप….
राकेश अस्थाना ने अपने पत्र में लिखा था कि आलोक वर्मा ने जानबूझकर शरारती एवं नियम तोड़ने वाले अफसरों की सूची-2018 में शामिल डीएसपी अजय बस्सी को अपना चहेता बना लिया था। तत्कालीन बॉस को रिपोर्ट न कर बस्सी सीधे सीबीआई निदेशक के कमरे में जाता था।वर्मा ने ही विशेष तौर से अजय बस्सी को गुजरात जाने के लिए तैयार किया।डीएसपी को यह भी कहा गया कि अस्थाना के खिलाफ कुछ भी मिले, उसे छोड़ना मत।मामला दर्ज होने के बाद लिखे एक अन्य पत्र में अस्थाना ने लिखा, वर्मा ने अब इसी अधिकारी को मेरे खिलाफ दर्ज मामले की जांच के लिए लगा दिया है। 

आलोक वर्मा और ईडी के ज्वाइंट डायरेक्टर पर लगाया था छवि खराब करने का आरोप…
अस्थाना के मुताबिक, सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और ईडी के ज्वॉइंट डायरेक्टर राजेश्वर सिंह सहित कई दूसरे अफसर मेरी छवि खराब करने में लगे थे। आरोप है कि इन अफसरों ने मेरे खिलाफ मीडिया में कई तरह के दस्तावेज लीक किए हैं।

24 सितंबर को लिखे पत्र में अस्थाना ने कहा, मेरे खिलाफ चल रहे इस दुष्प्रचार के माहौल में मैं अपनी डयूटी पूरी नहीं कर सकता। आलोक वर्मा मेरा करियर नष्ट कर देना चाहते हैं। अस्थाना ने लिखा है कि यह भी अंदेशा है कि वे मुझे किसी झूठे केस में फंसवाने की तैयारी कर रहे हैं। चूंकि मैं इस वक्त कई बड़े एवं संवेदनशील केसों की जांच कर रहा हूं, इसलिए वे मुझे जानबूझकर प्रताड़ित करने में लगे हैं।

वर्मा ने स्टरलिंग बायोटेक मामले में भी सीबीआई की कार्यप्रणाली को ताक पर रखकर मेरे खिलाफ रोविंग इंक्वायरी शुरू करा दी। इसके अलावा मुझे सीबीआई में ही कुछ बड़े अफसरों की संदिग्ध गतिविधियां साफ तौर पर नजर आ रही हैं। लिहाजा सीबीआई जैसे बडे संगठन में टॉप बॉस की गतिविधियों पर नजर रखने के कोई मेकेनिज्म भी नहीं है, इसलिए आप इस मामले में नियमानुसार कार्रवाई कर सकते हैं।

राकेश अस्थाना के गंभीर आरोप…वर्मा का इशारा था कि आरोपी सतीश बाबू सना को गिरफ्तार न किया जाए 

  • – मोईन कुरैशी मामले में जांच अधिकारी, एसआईटी के एसपी और ज्वॉइंट डायरेक्टर ने सतीश बाबू सना की गिरफ्तारी के लिए सिफारिश की थी।स्पेशल निदेशक अस्थाना ने भी इस फाइल पर अपनी मुहर लगाकर इसे 20 सितंबर को निदेशक आलोक वर्मा के पास भेज दिया।वर्मा ने सीबीआई के तय नियमों का उल्लंघन कर इस फाइल को कानूनी मामलों के निदेशक ओपी वर्मा  
  • के सुपुर्द कर दिया।उसमें वर्मा ने कुछ लाइनें भी लिखी, जिनका साफ मतलब था कि सतीश को गिरफ़्तार न किया जाए।
  • – वर्मा इन सात केसों में भी गलत इरादे से हस्तक्षेप कर रहे थे….
  • – अस्थाना ने सीवीसी और कैबिनेट सचिव से अपील की थी कि सीवीसी सीधे तौर पर इन केसों की निगरानी करे या फिर इनकी जांच के लिए नई एसआईटी बनाई जाए।इनमें संदेसरा ग्रुप आईटी अॉफिशियल, संदेसरा ग्रुप बीएस-एफएस नई दिल्ली, उपेंद्र राय एवं अन्य, राकेश तिवारी एवं अन्य, दीपेश चांडक एवं अन्य, ईओ-2 शाखा के अज्ञात अधिकारी आदि मामले शामिल हैं।
  • – आलोक वर्मा ने मोईन कुरैशी मामले में सतीश बाबू सना की पूरी मदद की है। सीबीआई निदेशक से बातचीत होने के बाद सतीश आठ मार्च 2018 और पांच जून 2018 को नोटिस मिलने के बावजूद जांच में शामिल होने के लिए सीबीआई मुख्यालय नहीं आया।
  • – आरोप है कि वर्मा ने बीएनआर होटल केस, जो कि लालू प्रसाद यादव के खिलाफ दर्ज हुआ था, के मुख्य संदिग्ध को एफआईआर से बाहर करा दिया। खास बात है कि आरोपी का नाम एफआईआर में शामिल करने के लिए आईओ, एसपी, डीआईजी, जेडी और एडीशनल डायरेक्टर सीबीआई ने भी सिफारिश की थी।
  • – अस्थाना ने अपने पत्र में लिखा है कि वर्मा ने सतीश बाबू को इस केस में राहत देने के लिए उससे दो करोड़ रुपये लिए हैं। बदले में उसकी गिरफ़्तारी नहीं हुई और पूछताछ में भी छूट मिल गई।
  • – सीबीआई निदेशक वर्मा ने ईडी के अधिकारी एनबी सिंह को काफी राहत दी है। पूछताछ के दौरान उसका मोबाइल फ़ोन तक नहीं लिया गया।
  • – बीएसएफ के डीजी केके शर्मा की सिफारिश पर आईपीएस राजीव कृष्णा को सीबीआई में लिया गया।उनकी पत्नी मीनाक्षी आईआरएस अधिकारी हैं और ईडी के ज्वाइंट डायरेक्टर राजेश्वर सिंह की बहन हैं।
  • – अस्थाना का आरोप है कि दिल्ली के पुलिस आयुक्त रहते हुए वर्मा ने सोने की तस्करी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने दी, यह एयरपोर्ट का मामला है।
  • – 30 जनवरी 2018 को सीबीआई ने बीएसएफ के एक कमांडेंट के खिलाफ पशु तस्करी का केस दर्ज किया था।सीबीआई ने कमांडेंट जेबू डी मैथ्यू के पास से 45.65 लाख रुपये भी बरामद कर लिए।जांच में सामने आया कि यह राशि उसने बांग्लादेश के पशु तस्करों से ली है।वर्मा ने बीएसएफ के अफसर का पूरा बचाव किया।
  • – हरियाणा के नागली उमरपुर और टिगरा उल्लावास में जमीन अधिग्रहण केस में 36 करोड रुपये की कथित तौर पर घूस दी गई थी।बताया गया है कि इस मामले से जुड़े अधिकारी टीसी गुप्ता, कंपनी मालिक ललित गुप्ता, सीबीआई के ज्वाइंट डायरेक्टर अरुण कुमार और डायरेक्टर आलोक वर्मा के बीच कथित तौर पर जबरदस्त लाइजनिंग रही है।
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