इस पायलट ने घर की छत पर बनाया प्लेन, जानिए पूरा मामला

- in महाराष्ट्र

मुंबई। कुछ करने की जिद हो, तो कोई भी काम मुश्किल नहीं होता है। यह कर दिखाया है देश के एक पायलट अमोल यादव ने। उन्होंने अपने घर की छत पर विमान बनाया, लेकिन सरकारी एजेंसियों की ओर से मंजूरी नहीं मिलने के कारण वे इसे उड़ा नहीं पाए।

इस पायलट ने घर की छत पर बनाया प्लेन, जानिए पूरा मामला एक प्राइवेट एयरलाइन के पायलट अमोल यादव ने सात साल पहले अपने परिजनों और दोस्तों से कहा था कि वह घर की छत पर एक प्लेन बनाएंगे। जब लोगों ने उनसे पूछा कि वह इसे नीचे कैसे उतारेंगे, तो उन्होंने कहा था कि पता नहीं। और छह साल बाद पिछले साल मार्च में वह छह लोगों के बैठने वाला एक प्लेन बना चुके थे।

यादव का दावा है कि भारत में किसी घर पर बनने वाला यह पहला प्लेन है। यह 3920 मीटर की ऊंचाई पर दो हजार किमी की दूरी 342 किमी की रफ्तार से तय कर सकता है। उन्होंने क्रेन की मदद से प्लेन को छत से नीचे उतारा ताकि लोगों को वह इसे दिखा सकें।

मुंबई में शुरू हो रहे सरकार के मेक इन इंडिया प्रोग्राम में यादव ने अपने प्लेन को दिखाने के लिए अधिकारियों से इजाजत मांगी। मगर, अधिकारियों ने यह कहते हुए उन्हें इससे मना कर दिया कि वहां जगह नहीं है।

मगर, वह निराश नहीं हुए। उन्होंने रातों-रात प्लेन को डिस्मेंटल किया और क्रेन की ममद से उसके पुर्जों को घर की छत से नीचे उतारा। सड़क पर खड़े दो ट्रकों में विमान के पुर्जों को रखा गया। इसके बाद वह उसे प्रदर्शिनी स्थल से करीब 25 किमी दूर ग्राउंड पर ले गए।

यहां उन्होंने विमान के पुर्जों को फिर से जोड़ा और अपनी जिद के विमान को लोगों के लिए पेश कर दिया। एक स्थानीय अखबार और चैनल ने यह खबर प्रकाशित की, तब लोग विमान के साथ सेल्फी लेने के लिए टूट पड़े।

इस पायलट ने घर की छत पर बनाया प्लेन, जानिए पूरा मामला

यादव का कहना है कि वह अब भारत के पहले स्वदेशी विमानों का व्यावसायिक निर्माण करने के लिए तैयार हैं। उनके प्रोजेक्ट में निवेशकों ने भी रुचि दिखाई है। भाजपा की अगुवाई वाली सरकार ने 19-सीटों वाले हवाई जहाज बनाने के लिए 157 एकड़ जमीन कारखाना स्थापित करने के लिए देने का वादा किया है।

इस पायलट ने घर की छत पर बनाया प्लेन, जानिए पूरा मामला

भारत में करीब 450 वाणिज्यिक विमान हैं और घरेलू हवाई यातायात स्थिर गति से बढ़ रहा है। यादव का मानना है कि निवेशकों और सरकार की मदद से उनके कारखाने में छोटे विमानों का निर्माण किया जा सकता है। इससे क्षेत्रीय एयर कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिलने के साथ ही रोजगार भी बढ़ेगा।

हालांकि, देश के पहले होम ग्रोन एविएटर बनने के सपने के पूरा होने के बीच एक बड़ा रोड़ा है। अमोल यादव का कहना है कि स्थानीय सरकार, सांसदों के के अनुरोधों और प्रधानमंत्री मोदी के कार्यालय की अपील के बावजूद, भारत के एयरलाइंस नियामक ने छत में बनाए गए इस विमान के पंजीकरण करने में उन्हें पिछले छह वर्षों से निराश किया है।

वह कहते हैं कि वे (नियामक) मुझे हताशा करने के नियमों को बदलते रहते हैं। नियामक का कहना है कि नागरिक उड्डयन अधिकारियों को शौकिया निर्मित विमान के डिजाइन और विकास के लिए डिजाइन मानदंडों को विकसित करना चाहिए।

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