इस उंगली को यूं क्यों उठा नहीं पाते लोग, जबकि बाकी उंगलियां उठ जाती हैं

- in जीवनशैली

मेरे कहने पर दो मिनट निकालिए. अपने नॉट सो व्यस्त स्केड्यूल में से. अब वैसे-वैसे कीजिए जैसा मैं कह रहा हूं. अपना हाथ लीजिए और बीच वाली उंगली (मध्यमा) को मोड़कर उसे टेबल पर रखिए. रखिए माने पसारिए. अब एक काम कीजिए एक-एक करके अपनी उंगलियां उठाने की कोशिश कीजिए. अंगूठा आप उठा लेंगे. तर्जनी (अंगूठे के बाजू वाली; वो उंगली जिसे आप किसी को धमकी देने के लिए दिखाते हैं) भी उठ जाएगी. और कनिष्ठा (सबसे छोटी उंगली) भी.इस उंगली को यूं क्यों उठा नहीं पाते लोग, जबकि बाकी उंगलियां उठ जाती हैंइस उंगली को यूं क्यों उठा नहीं पाते लोग, जबकि बाकी उंगलियां उठ जाती हैं

अब कोशिश कीजिए अनामिका को उठाने की. माने रिंग फिंगर. नहीं उठी? ज़ोर लगाइए. पूरा ज़ोर. अब भी नहीं उठी न. छोड़िए. आपसे न उठेगी. क्योंकि किसी से नहीं उठी आज तक. क्योंकि उठ ही नहीं सकती. क्योंकि इसके पीछे है विज्ञान. आपके शरीर का.

पहली वजह

शरीर में हड्डी और मांसपेशी होती है और ये दोनों साथ काम करें, तभी हम अपना शरीर हिला पाते हैं, चल पाते हैं. इतना सब जानते हैं. हाथ में तर्जनी और कनिष्ठा को हिलाने के लिए अलग-अलग एक्सटेंसर मसल (ये वहां होते हैं, जहां-जहां शरीर के अंग किसी एंगल पर झुक सकते हैं) होते हैं. लेकिन मध्यमा और अनामिका को हिलाने के लिए बने एक्सटेंसर मसल साथ जुड़े होते हैं. इन जुड़े हुए मसल को एक्सटेंसर डिजिटोरम कहा जाता है. इसलिए ये दोनों उंगलियां ज़्यादातर साथ हिलती हैं.

दूसरी वजह

हड्डी और मांसपेशी का जोड़ा अपने-आप में पूरा नहीं होता. इन्हें चलाने के लिए स्टोरी में एक ‘तीसरे’ की ज़रूरत पड़ती है. इस तीसरे का नाम होता है नस. वो नहीं, जिसमें खून चलता है. तंत्रिका तंत्र वाली नस. अंग्रेज़ी में नर्व. नस के सहारे ही दिमाग हाथ को सिग्नल भेजता है कि कौन-सी उंगली हिलानी है. हाथ में दो तरह की नसें होती हैं – रेडियल नर्व और उल्नर नर्व.

रेडियल नर्व अंगूठे, तर्जनी और मध्यमा के एक हिस्से तक सिग्नल ले जाती है. उल्नर नर्व कनिष्ठा, अनामिका और मध्यमा के दूसरे हिस्से तक पहुंचाती है. माने मध्यमा को दोनों नसों से सिग्नल मिलता है. अब बात ये है कि मध्यमा और अनामिका की नसें आपस में उलझी हुई हैं. ये वैसा ही है जैसे दो नंगे तार पास-पास हों तो शॉर्ट सर्किट हो जाता है. इसी शॉर्ट-सर्किट की वजह से अनामिका को अकेले हिलाना मुश्किल होता है, वो मध्यमा के साथ ही चलती है.

लेकिन चूंकि मध्यमा को सिग्नल रेडियल नर्व से भी मिल जाता है, वो अनामिका के बिना आराम से हिल लेती है.

लेकिन…

यूट्यूब पर जाकर ‘the paralyzed finger’ सर्च कीजिए. आपको कई सारे वीडियो मिलेंगे जिनमें हमारी बताई एक्टिविटी में ही लोगों की रिंग फिंगर आराम से हिल रही है. बिना मिडल फिंगर हिलाए. अब आप पूछेंगे कि ऐसा क्यों. तो दोस्त ऐसा है कि कुछ लोगों में  एकस्टेंसर डिजिटोरम वाली समस्या नहीं होती है, या मसल आपस में पूरी तरह जुड़े नहीं होते. ऐसे लोग मध्यमा के बिना ही अनामिका को हिला लेते हैं. और ये लोग खास नहीं हैं. प्रैक्टिस की जाए तो कोई भी ऐसा कर सकता है.

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