इस आसान तरीके से जानिए आपका रुद्राक्ष असली या नकली

अपना स्तर ऊंचा उठाने में लगे साधकों का चित्त भी सामान्य लोगों की तुलना में छोटी-छोटी चीजों से प्रभावित होता है। उन्हें हर कहीं नींद नहीं आती। भोजन भी शुद्ध-सात्विक ही चाहिए। जिन लोगों के बीच वह हैं, उनमें भी कुछ खास विशेषताएं हों। ये विशेषताएं उनके गुण, स्वभाव और कर्म के आधार पर तय होती हैं। इस तरह के उपायों में रुद्राक्ष का भी नाम है।इस आसान तरीके से जानिए आपका रुद्राक्ष असली या नकली

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इस बीज में एक अनोखा स्पदंन पाया गया है, जो साधक के लिए एक सुरक्षा कवच बना देता है। रुद्राक्ष के पेड़ खासकर हिमालय और पश्चिमी घाट समेत कुछ और जगहों पर पाए जाते हैं। अपने देश में रुद्राक्ष के पेड़ की लकड़ियों का इस्तेमाल रेल की पटरी बनाने में होता रहा है। ज्यादा खपत होने के कारण अपने यहां रुद्राक्ष कम ही बचे हैं। साधु-संन्यासी और साधकों के लिए रुद्राक्ष बहुत सहायक होता है।

रुद्राक्ष की शुद्धता परखने की एक विधि यह हैं कि उसे पानी के ऊपर रखा जाए, तो वह खुद-ब-खुद घड़ी की दिशा में घूमने लगता है। अगर वह यूं ही रखा रहे या डूब जाए, तो समझा जाता है कि रुद्राक्ष असली नहीं है। रुद्राक्ष की इस विशेषता से पानी की गुणवत्ता परखी जाती है। पानी पर रखने से वह अगर उत्तर से दक्षिण दिशा की ओर नहीं घूमता, तो मतलब पानी पीने लायक है। पानी हानि पहुंचाने वाला हुआ, तो रुद्राक्ष उत्तर की ओर यानी घड़ी की दिशा से उल्टा घूमेगा। रुद्राक्ष के लौकिक जीवन में और भी उपयोग हैं। सामान्य लोगों के लिए भी उसकी उपयोगिता है। नकारात्मक ऊर्जा से बचाव के और भी उपाय खोज लिए गए हैं, पर आध्यात्मिक उन्नति के मामले में रुद्राक्ष की टक्कर का एक भी नहीं है।

 
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