आख़िर क्यों एपल को अपने सबसे बड़े एनुअल इवेंट के लिए देसी डेवलपर्स की जरूरत है

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पलाश तनेजा जब 10वीं क्लास में थे तो उन्हें डेंगू हो गया था और वो तीन महीने बिस्तर पर रहे. 18 साल के नई दिल्ली के इस युवा ने फिर एक ऐसा एप बनाया जिससे आप अस्पताल में बेड की उपलब्धता का पता कर सकते हैं. इसी तरह अखिल तोलानी जो 13 साल के हैं उन्होंने ने भी एक म्यूजिक प्लेयर यानी की ”iMusic” को एपल स्टोर पर लॉन्च किया. म्यूजिक प्लेयर को उस दौरान 5,00,000+ डाउनलोड्स किए गए थे और इसके 3 साल बाद स्वीडन की एक कंपनी ने इस एप को अधिकृत कर लिया.

अब तोलानी, तनेजा और दूसरे एपल के एनुअल डेवलपर कॉन्फ्रेंस का हिस्सा होंगे जो WWDC है. इसकी शुरूआत 3 जून से सैन होजे, कैलिफोर्निया में होगी.

जय फिर्के मैक्रो विजन एकेडमी बुरहानपुर के छात्र हैं जो एक पोर्टफोलियो iOS एप पर काम कर रहे हैं. जहां क्लास टीचर अपने छात्रों के स्किल के बारे में अपनी रिपोर्ट भर सकते हैं. बता दें कि हर साल एपल अपने WWDC में कुछ छात्रों को इवेंट में लेकर जाता है तो वहीं उन्हें एक साल का एपल डेवलपमेंट प्रोग्राम का मेंबरशिप भी मिलता है. सुदर्शन श्रीराम 17 साल के हैं और साल 2018 में वो एपल के इवेंट में भाग ले चुके हैं. उन्होंने ने अपने अनुभव के बारे में बताया कि मैं साल 2018 का स्कॉलरशिप विजेता था. मैं इतना तो कह सकता हूं कि कॉन्फ्रेंस अटेंड कर मुदे काफी कुछ सीखने को मिला.

बता दें कि हर साल ऐसे ही बच्चों को एपल अपने इवेंट में लेकर जाता है और उन्हें नई नई चीजें सिखाता है तो वहीं बाद में उन्हें 1 साल का स्कॉलरशिप भी देता है.

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