आर्क बिशप और मुस्लिम संगठनों का जवाब देने के लिए संत समिति ने बनाई यह रणनीति

लोकसभा चुनाव से ठीक पहले देश में फतवों की राजनीति चरम पर होगी। आर्क बिशपों द्वारा मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने और हर चुनाव से पहले मुस्लिम धर्म से जुड़ी संस्थाओं द्वारा फतवा जारी करने की प्रवृत्ति के खिलाफ विहिप और अखिल भारतीय संत समिति ने जवाबी मोर्चा खोलने की रणनीति बनाई है। इनकी योजना अक्टूबर महीने में दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में 5000 संतों द्वारा पीएम नरेंद्र मोदी के पक्ष में फतवा जारी कराने की है। आर्क बिशप और मुस्लिम संगठनों का जवाब देने के लिए संत समिति ने बनाई यह रणनीति

गौरतलब है कि बीते साल उत्तर प्रदेश में भाजपा को वोट न देने के लिए कई मुस्लिम संगठनों ने फतवा दिया था। हाल ही में कैराना और नूरपुर में हुए उपचुनाव से पहले देवबंद ने जहां भाजपा के खिलाफ फतवा दिया वहीं दिल्ली और गोवा के आर्कबिशप ने देश में धर्मनिरपेक्षता-लोकतंत्र के खतरे में होने का दावा करते हुए मोदी सरकार के खिलाफ परोक्ष रूप से निशाना साधा। इसी दौरान मिजोरम में राजशेखरन को राज्यपाल बनाए जाने का इसाई संगठनों ने कथित तौर पर विरोध किया।
 
अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि धर्म और राजनीति का घालमेल उचित नहीं है। संविधान भी इसकी इजाजत नहीं देता। बावजूद इसके चुनाव आयोग ने कोई कार्रवाई नहीं की। हिंदू संगठनों ने कभी भी इसाई या मुस्लिम धर्म संस्थाओं की तरह धर्म को आधार बना कर धार्मिक आदेश नहीं दिया। यह खतरनाक प्रवृत्ति लगातार बढ़ती जा रही है।  

ऐसे में हम ऐसे खतरनाक और अस्वीकार्य धार्मिक आदेशों के खिलाफ मोर्चा खोलने के लिए बाध्य हैं। अक्टूबर महीने में दिल्ली में कम से कम 5000 शीर्ष स्तर के साधु संत जुटेंगे और इसाई और मुसलिम धार्मिक संस्थाओं के फतवों के जवाब में मोदी सरकार को समर्थन देने का प्रस्ताव पारित करेंगे। 

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