आप-कांग्रेस गठबंधन की राह में ये तीन सीटें बनीं रोड़ा…

दिल्ली में आप-कांग्रेस गठबंधन की बातें कई महीनों से चल रही हैं। इस मामले में जहां कांग्रेस ने हमेशा अपना पक्ष स्पष्ट रूप से उजागर नहीं किया है वहीं आप अति उत्साही दिखी है। वह बार-बार कहती रही है कि भाजपा को हराने के लिए वो कांग्रेस के साथ आने को तैयार है।

आप-कांग्रेस गठबंधन की राह में ये तीन सीटें बनीं रोड़ा...

बता दें कि शीला दीक्षित के गठबंधन से इनकार करने के बाद भी जानकारों का मानना था कि चुनाव से पहले दोनों पार्टियां एक हो ही जाएंगी। वहीं बीते दिनों कांग्रेस के दिल्ली प्रभारी पीसी चाको द्वारा रायशुमारी के लिए जारी किए ऑडियो मैसेज से ये बात और पुख्ता हो गई कि कांग्रेस भी आप से दिल्ली में गठबंधन चाहती है।

कहा तो ये भी जा रहा है कि गठबंधन तो शुरू से ही दोनों पार्टियां चाहती हैं लेकिन इसकी राह में दिल्ली की तीन सीटें रोड़ा बन रही हैं। दरअसल जिन तीन सीटों की बात हो रही है वहां कांग्रेस और आप दोनों का वोट बैंक है। आगे पढ़िए कौन सी हैं वो तीन सीटें जिस पर फंसा है पेंच और किन पर उम्मीदवारों पर लगा है दांव जिनके कारण गठबंधन हो रहा है मुश्किल…

किन फॉर्मूलों पर चल रहा है काम…
कांग्रेस और आप दोनों का ही वोट बैंक अल्पसंख्यक, अनुसूचित जाति और स्लम एवं रीसेटलमेंट कॉलोनियों में रहता है। ऐसे में संभावित सीटों का पेंच फंसा हुआ है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता की मानें तो इस वक्त 3:3:1 के फॉर्मूले पर काम चल रहा है। इसके तहत दोनों ही पार्टियां अपने तीन-तीन उम्मीदवारों को उतार सकती हैं और एक सीट पर निष्पक्ष उम्मीदवार उतारा जाना है। हालांकि किस सीट पर कौन सी पार्टी अपना उम्मीदवार उतारेगी यह तय कर पाना मुश्किल हो रहा है।

जानकारों का मानना है कि आम आदमी पार्टी ने जिस तरह गठबंधन को लेकर उतावलापन दिखाया है उससे उसका पेक्ष कमजोर हो सकता है। सूत्रों का कहना है कि आप ने अपने जिन 6 उम्मीदवारों की घोषणा की है उनमें से वह तीन को बहुत मजबूत मानती है। वो तीन उम्मीदवार जिन तीन सीटों पर खड़े हैं, उनमें पूर्वी दिल्ली, उत्तर पूर्वी दिल्ली और दक्षिणी दिल्ली है। इन्हीं तीन सीटों पर दोनों पार्टियों का वोटबैंक मानी जाने वाली जनसंख्या बड़ी मात्रा में रहती है।

ये हैं आप के मजबूत दावेदार
आप ने इन तीन सीटों से अपने सबसे मजबूर दावेदार आतिशी, दीलीप पांडेय और राघव चड्ढा को खड़ा किया है। पार्टी को इन तीनों पर ही पूरा भरोसा है कि ये तीन सीटें उसके खाते में आ सकती हैं। वहीं कांग्रेस के एक नेता ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर बताया कि अगर पार्टी को तीन सीटें मिलती हैं तो वह पूर्वी दिल्ली और उत्तर पूर्वी दिल्ली की सीटें जरूर हासिल करना चाहेंगे जिससे वह 2004 और 2009 में जीत हासिल कर चुके हैं। उन्होंने ये भी बताया कि कांग्रेस उन सीटों पर लड़ना चाहती है जहां अल्पसंख्यक, पिछड़े और एससी वोट बड़ी मात्रा में हों।

कांग्रेस तीन सीटों पर उतारना चाहती है इन दिग्गजों को
जानकारी के अनुसार उत्तर पूर्वी दिल्ली में सबसे ज्यादा आबादी मुस्लिम वोटरों की है। उसके बाद दलित, फिर पिछड़ी जातियों के वोटर यहां रहते हैं। इसी तरह पूर्वी दिल्ली में सबसे ज्यादा पिछड़ी जातियों के वोटर हैैं फिर एससी और फिर मुस्लिम वोटर हैं। सूत्रों का कहना है कि इसलिए भी कांग्रेस ये सीट चाहती है और संदीप दीक्षित को यहां से टिकट देने की योजना है। वहीं कांग्रेस नेता जय प्रकाश अग्रवाल तीन बार चांदनी चौक से जीतने के बाद 2009 में उत्तर पूर्वी दिल्ली से आराम से जीत हासिल की थी।

आम आदमी पार्टी किसी भी कीमत पर आतिशी को पूर्वी दिल्ली और उत्तर पूर्वी दिल्ली से दिलीप पांडेय को हटाना नहीं चाहेगी। पार्टी को इन दो नेताओं के अलावा राघव चड्ढा की जीत पर भी काफी भरोसा है जो दक्षिणी दिल्ली से उम्मीदवार हैं। अब मामला यहीं फंस रहा है कि दोनों ही पार्टियां इन तीन सीटों पर अपने-अपने उम्मीदवार उतारना चाह रही हैं।

वहीं जिस सीट पर दोनों ही पार्टियां अपना दावेदार नहीं ढूंढ पा रही हैं वह है पश्चिमी दिल्ली। यह सीट भाजपा का मजबूत गढ़ मानी जाती है क्योंकि यहां सिख(12 प्रतिशत), पंजाबी-खत्री(12 प्रतिशत) और जाट(8 प्रतिशत) बड़ी संख्या में हैं। ये वोट भाजपा के माने जाते हैं।

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