आपने हमारा साथ दिया, हम आपका साथ देंगे: मोदी सरकार के सपोर्ट में मुस्लिम महिलाएं

लखनऊ. केन्द्र सरकार के प्रस्तावित तीन तलाक कानून के समर्थन में मुस्लिम महिलाओं ने लखनऊ के रोमी गेट पर इक्ट्ठा होकर पीएम मोदी को धन्यवाद दिया। इसी तरह गोरखपुर और वाराणसी में मुस्लिम महिलाओं ने तीन तलाक के प्रस्तावित कानून के समर्थन में एकजुट हुईं। उन्होंने कहा, गुजरात की महिलाएं बीजेपी को वोट देकर जिताएं। ट्रिपल तलाक पर केन्द्र बना रहा है कानूनआपने हमारा साथ दिया, हम आपका साथ देंगे: मोदी सरकार के सपोर्ट में मुस्लिम महिलाएं

– केंद्र सरकार तीन तलाक पर रोक के लिए बिल लाने की तैयारी कर रही है। न्यूज एजेंसी के मुताबिक, न्यू बिल का ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है। मसौदे के तहत एक बार में तीन तलाक देने पर विक्टिम के पति को तीन साल जेल हो सकती है। उसे महिला और उसके नाबालिग बच्चों को हर्जाना देना होगा।

– ये गैरजमानती अपराध होगा। बिल को ‘मुस्लिम वुमन प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन मैरिज बिल’ नाम दिया गया है। बता दें कि अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिपल तलाक को गैरकानूनी करार दिया था। इसके बाद भी देश में ट्रिपल तलाक से जुड़े कुछ मामले सामने आए थे। सरकार की तरफ से कहा गया था वो तीन तलाक पर रोक लगाने के लिए नया कानून ला सकती है।

ड्राफ्ट कमेटी में राजनाथ के अलावा और कौन?

– इस बिल का ड्राफ्ट यूनियन कैबिनेट मिनिस्टर्स की एक कमेटी ने तैयार किया है। राजनाथ सिंह इसके हेड हैं। उनके अलावा सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, रविशंकर प्रसाद और उनके जूनियर पीपी. चौधरी कमेटी में हैं।

क्या कर सकेगी विक्टिम?

– मसौदे में सिर्फ एक बार में तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) को ही शामिल किया गया है। अगर किसी मुस्लिम महिला को एक बार में तीन तलाक दिया जाता है तो वो मजिस्ट्रेट के सामने इसके खिलाफ अपील और हर्जाने की मांग कर सकती है। हर्जाना विक्टिम और उसके नाबालिग बच्चों के लिए होगा।
– इसके अलावा, महिला अपने नाबालिग बच्चों की कस्टडी भी मांग सकती है। आखिरी फैसला मामले की सुनवाई करने वाला मजिस्ट्रेट ही करेगा।

वॉट्सऐप पर भी नहीं दे सकेंगे 3 तलाक

– मसौदे के मुताबिक, एक बार में तीन तलाक या तलाक-ए-बिद्दत किसी भी रूप में गैरकानूनी ही होगा। बोलकर या इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस (यानी वॉट्सएेप, ईमेल, एसएमएस) के जरिए भी एक बार में तीन तलाक गैरकानूनी ही होगा।
– एक अफसर ने कहा- “हर्जाना और बच्चों की कस्टडी महिला को देने का प्रावधान इसलिए रखा गया है, ताकि महिला को घर छोड़ने के साथ ही कानूनी तौर पर सिक्युरिटी हासिल हो सके। इस मामले में आरोपी को जमानत भी नहीं मिल सकेगी।”

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी नहीं रुका ट्रिपल तलाक

– एक अफसर ने कहा- सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिपल तलाक को गैरकानूनी करार दिया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के पहले 177 (2017 में) और फैसले के बाद 66 मामले सामने आए। सबसे ज्यादा केस यूपी से हैं। इसलिए सरकार को इस पर कानून लाना पड़ रहा है।
– इस अफसर ने आगे कहा- “डोमेस्टिक वॉयलेंस एक्ट है, लेकिन इससे बहुत मदद नहीं मिल पाई। पीएमओ के पास कई महिलाओं की शिकायतें आ रही हैं।”

‌विंटर सेशन में लाया जा सकता है बिल

– ट्रिपल तलाक से जुड़ा कानून पार्लियामेंट के विंटर सेशन में लाया जा सकता है। फिलहाल, यह राज्यों को भेजा गया है और उनसे इस पर जल्द से जल्द जवाब और राय मांगी गई है।

आगे क्या होगा?

– केंद्र को राज्य सरकारों के जवाब का इंतजार है। इनके जवाब मिलने के बाद बिल को कैबिनेट के सामने पेश किया जाएगा। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद ही इसे पार्लियामेंट के विंटर सेशन में पेश किया जाएगा।
– दिक्कत ये है कि कानून ना होने की वजह से पुलिस भी ट्रिपल तलाक के मामले में विक्टिम की मदद नहीं कर पाती और आरोपी भी बच जाता है।

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सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?

– 23 अगस्त को 1400 साल पुरानी तीन तलाक की प्रथा पर सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। 5 जजों की बेंच ने 3:2 की मेजॉरिटी से कहा था कि एक साथ तीन तलाक कहने की प्रथा यानी तलाक-ए-बिद्दत वॉइड (शून्य), अनकॉन्स्टिट्यूशनल (असंवैधानिक) और इलीगल (गैरकानूनी) है। बेंच में शामिल दो जजों ने कहा था कि सरकार तीन तलाक पर 6 महीने में कानून बनाए।

 

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