आखिर क्यों मौसा की ज्यादती की शिकार हुई नाबालिग ने थाने में बदले बयान ?

- in मध्यप्रदेश

इंदौर। मेरे साथ मौसाजी ने कुछ नहीं किया। वे तो अच्छे हैं। थोड़ा-बहुत हुआ था ज्यादा कुछ नहीं किया था। मुझे पुलिस थाने में नहीं रहना, यहां बहुत डर लग रहा है। अपने घर जाना है। यह कहना था 16 साल की उस नाबालिग के जो अपने मौसा के शारीरिक शोषण की शिकार होकर मौसी के साथ थाने में शिकायत दर्ज करवाने पहुंची थी। पुलिस की लापरवाही से चंद घंटों में ही पीड़िता ने बयान बदल दिए।

पुलिस ने बच्ची को आश्रयगृह में रखवाने के बजाय बयान लेकर वापस मौसी के घर भेज दिया था। सोमवार रात चितावद निवासी सोलह वर्षीय किशोरी ने अपनी मौसी के साथ भंवरकुआं थाने पर मौसा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। उसने अपने बयान में बताया था कि मौसी के काम पर जाने के बाद मौसा ने पांच साल की अपनी बेटी को दुकान पर सामान लेने भेजकर दुष्कर्म किया। बेटी जल्दी वापस आ गई और पिता को गलत काम करते देख लिया। उसने यह बात अपनी मां को बता दी।

वहीं पीड़िता ने भी मौसी को इस बारे में बताया। पुलिस ने उसके बयान के आधार पर मौसा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। सोमवार रात पीड़िता को पुलिस ने मौसी को सौंप दिया, जबकि नियमानुसार उसे चाइल्ड लाइन या आश्रयगृह में रखवाना था, ताकि उसकी काउंसलिंग होने से वह अपने बयान से मुकर न सके। मंगलवार सुबह पीड़िता ने बयान बदल दिए। उसने कहा वह किसी को सजा दिलवाना नहीं चाहती। हालांकि मंगलवार को पीड़िता की मेडिकल जांच कराई गई है।

थाने में बच्चों के साथ अमानवीय बर्ताव : चाइल्ड लाइन निदेशक वसीम इकबाल ने कहा कि पुलिस थानों पर पीड़ित बच्चों के साथ काफी अमानवीय व्यवहार हो रहा है। पुलिस पॉक्सो एक्ट को समझे बिना कार्रवाई कर रही है। पॉक्सो कानून के तहत पुलिस को बच्चों से वर्दी में बात नहीं करने के साथ ही घर या संस्था में बयान लेना होते हैं, लेकिन पुलिस बच्चों को कई बार थाने के चक्कर कटवाती है। नियमानुसार पुलिस को बच्चों की सहूलियत वाली जगह पर जाकर बयान लेना चाहिए, ताकि वे सच बोलने में न घबराएं। बच्चों को थोड़ा भी डांटने या चिल्लाने पर वे अपना बयान बदल देते है।

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