आखिर क्यों करना पड़ा भगवान कृष्ण को कर्ण का अंतिम संस्कार?

कर्ण महाभारत में एक ऐसा धानी था जो कि देव पुत्र होने के बावजूद भी उसे सामाजिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा और उसको समाज ने हमेशा अस्वीकार ही किया गया। कर्ण एक बहुत ही महान योद्ध और दानी राजा था. परन्तु कर्ण ने कुरुक्षेत्र में अपने पांडवो भाइयों का साथ छोड़कर के कौरवों का साथ दिया था। और कौरवों का साथ देने के बावजूद भी ऐसा क्या हुआ होगा जिसकी वजह से कृष्ण को कर्ण का अंतिम संस्कार करना पड़ा था। तो फिर आइये जानते है कि आखिर कृष्णा ने कर्ण का अंतिम संस्कार क्यों किया था।
कुंती व सूर्य का पुत्र था और कर्ण को कुंती ने कर्ण को अनब्याहा होते हुए ही जन्म दिया था। और एक रथ सारथी ने ही कर्ण का पालन पोषण किया था जिसके कारण से कर्ण सूतपुत्र कहलाता था। कुंवारी माता से जन्म और रथ सारथि के पालन-पोषण के कारण से ही कर्ण को कभी इस समाज में ना तो सम्मान मिला और ना अपना अधिकार। और कर्ण के सुतपुत्र होने की वजह से ही द्रोपदी जिसको कर्ण अपनी जीवन साथी बनाना चाहता था उसने कर्ण से विवाह करने से इंकार कर दिया था।
इनही सब कारणों की वजह से ही कर्ण पांडवों से काफी नफरत ज़्यादा करता था। और इसी वजह से कुरुक्षेत्र युद्ध में उसने कौरवों का साथ दिया था। भगवान कृष्ण ही कर्ण की मौत का कारण बने थे भगवान कृष्ण ने ही अर्जुन को कर्ण के वध का ऐसा तरीका बताया था और इसी तरीके से ही कर्ण का वध हुआ था। एक Monster राजा होने की वजह से ही भगवान कृष्ण ने कर्ण के आखिरी समय में उसकी परीक्षा ली और मरते समय कर्ण से दान माँगा तो फिर कर्ण ने दान में अपने सोने के दांत तोड़कर के भगवान कृष्ण को अर्पण कर दिया।
इस इसी दानवीरता से खुश होकर भगवान कृष्ण ने कर्ण को वरदान मांगने के लिए कहा। और फिर कर्ण ने वरदान के रूप में अपने साथ हुए अन्याय को याद करके भगवान कृष्ण के अगले जन्म में उसके वंश के लोगो के कल्याण करने को कहा। और दूसरे वरदान के रूप में भगवान कृष्ण का जन्म अपने ही राज्य में लेने को कहा और फिर 3 वरदान के रूप में अपना अंतिम संस्कार कोई ऐसा शख्स करे जो पाप से एकदम मुक्त हो। और वरदान देते हुए भगवान कृष्ण ने कर्ण के सारे वरदान स्वीकार कर लिए लेकिन तीसरे वरदान से भगवान कृष्ण थोड़े दुविधा में आ गए थे और वह ऐसी जगह सोचने लगे जहाँ पर कोई पाप ना हुआ हो लेकिन भगवान कृष्ण को ऐसा कोई भी जो की पाप से मुक्त हो यह समझ ही नहीं आया।
भगवान कृष्ण वरदान देने के वचन बद्धता थे इसीलिए कर्ण का अंतिम संस्कार खुद भगवान कृष्ण ने अपने हाथो से कर दिया और कर्ण को दिए हुए अपने वरदान को पूरा कर दिया। और इस तरह से दानवीर कर्ण का अधर्म का साथ देने के बावजूद भी भगवान कृष्ण को कर्ण का अंतिम संस्कार करके उनको वीरगति के साथ बैकुंठ धाम भेजना पड़ा था।

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