असामान्य रूप से चढ़ रहा पारा तूफानों को न्यौता दे रहे है,ग्लोबल वार्मिंग के साइड इफेक्ट का भी असर

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असामान्य रूप से चढ़ रहा पारा तूफानों को न्यौता दे रहे है। ये तूफान ग्लोबल वार्मिंग का साइड इफेक्ट है। ताप वृद्धि इसी तरह से जारी रही तो आने वाले दिनों में तूफानों की संख्या बढ़ती जाएगी। तापमान में वृद्घि की मुख्य वजह वायु प्रदूषण है। 
आर्यभटट् प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) नैनीताल के पर्यावरणीय वैज्ञानिक डॉ. नरेंद्र सिंह के अनुसार गर्मी अभी ठीक से आई भी नही है और तापमान सामान्य से ऊपर जाने लगा है। मंगलवार को देश के विभिन्न हिस्सों में आए तूफानों के पीछे मुख्य वजह यही है। देश के विभिन्न हिस्सों में पिछले सप्ताहभर में तापमान सामान्य दो से पांच डिग्री सेल्सियस तक ऊपर जा पहुंचा था। इधर उत्तर पूर्वी व उत्तर पश्चिमी हवाओं के चलने से मौसम में बदलाव आ गया।

वायू प्रदूषण हैं तापमान में वृद्धि की बड़ी वजह 

तापमान में वृद्घि का एक मुख्य कारण वायु प्रदूषण है, जो दिनों दिन  हमारे वातावरण को अपने गिरफ्त में ले रहा है। इस पर काबू पाने का एक मात्र उपाय कार्बनडाई ऑक्साइड के लगातार हो रहे उत्सर्जन में कमी लाना है। यह गैस मानव द्वारा उत्सर्जित हो रही है। हरियाली बढ़ाकर ही पर्यावरण में संतुलन बनाया जा सकता है। ग्लोबल वार्मिंग का दूसरा साइड इफेक्ट एक्सट्रीम वेदर है। जिससे कभी लगातार गर्मी तो कभी लगातार बारिश हो रही है। अनुकूल मौसम के लिहाज से यह बेहद खतरनाक स्थिति है।

पीएम 2.5 की मात्रा बड़ी कई गुना

वायुमंडल में मौजूद पीएम (पार्टिकुलेटेड मैटर) 2.5 व पीएम 10 की समस्या से देश के सभी नगर जूझ रहे हैं। पीएम 2.5 की मात्रा सामान्य रूप से 60 माइक्रोग्राम क्यूबिक मीटर होनी चाहिए। परंतु इनकी संख्या दो से चार गुना तक अधिक पहुंचने लगी है। स्वास्थ्य के लिहाज से यह बेहद खतरनाक है। इसी तरह पीएम 10 की मात्रा सौ माइक्रोग्राम क्यूबिक मीटर होनी चाहिए। इसमें भी गुणात्मक वृद्घि हो रही है, जो स्वास्थ्य व पर्यावरण को गहरा आघात पहुंचा रही है। 

एरीज नजरें जमाए है पीएम 2.5 पर

आर्यभटट् प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) पीएम 2.5 प्रदूषण पर लगातार अध्ययनरत है। नैनीताल क्षेत्र इस प्रदूषण से मुक्त है। यहां इस  प्रदूषण का लेवल औसतन 25 से 30 माइक्रोग्राम क्यूबिक मीटर तक ही पहुंचता है। शीतकाल में ही कुछ हद तक ऊपर उठता है। 

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