अभी-अभी: हुआ बड़ा हादसा, फोन की घंटी से तय हो रही थी जिंदगी और मौत,पीएम ने जताया दुख

इंदौर। उत्तराखंड में हुए भीषण बस हादसे में इंदौर के 22 तीर्थयात्रियों की मौत हो गई है। राहत और बचाव कार्य देर रात तक चलते रहे और टीम ने रात में एक और शव बरामद किया। हादसे के बाद पीएम मोदी ने दुख जताते हुए ट्वीट कर दुख जताया है। पीएम ने लिखा है कि हादसे में जान गंवाने वालों के परिवारों के साथ मेरी प्रर्थनाएं और संवेदनाएं हैं। हादसे में मृतकों के परिवारों को पीएम राहत कोष के 2 लाख रुपए और घायलों के परिवारों को 50 हजार रुपए की सहायता दी गई है।अभी-अभी: हुआ बड़ा हादसा, फोन की घंटी से तय हो रही थी जिंदगी और मौत,पीएम ने जताया दुख

वहीं हादसे के बाद बेटमा के कुशवाह मोहल्ले के लोग ने बुधवार की रात आंखों ही आंखों में काटी। इस मोहल्ले के जो यात्री 12 मई को बस में सवार होकर धार्मिक यात्रा पर निकले थे, उसके दुर्घटनाग्रस्त होने की खबर आने के बाद मोहल्ले का माहौल बदल गया। जो लोग हादसे में लापता हुए हैं, उनमें से ज्यादातर मध्यमवर्गीय परिवार के हैं। कोई चाट का ठेला लगता है तो कोई फल बेचता है।

धार्मिक यात्रा की योजना निर्भरसिंह चौधरी नामक व्यक्ति ने बनाई थी। बड़ों के 16 से 20 हजार और बच्चों के 8 हजार रुपए यात्रा के लिए थे। शाम को जब खबर आई तो मोहल्ले के लोग थाने में जमा हो गए, क्योंकि उत्तरकाशी प्रशासन से भी सूचना थाने पर दी जा रही थी। थाने का फोन बरामदे में रखा था। जैसे ही फोन की घंटी बजती, भीड़ के बीच सन्नाटा पसर जाता।

इतने लोग घायल हैं, उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया है… ये अब तक लापता हैं.. जानकारी मिलते ही परिजन सूची में नाम तलाशने लग जाते। घायलों की सूची में नाम देखकर थोड़ी तसल्ली मिल रही थी लेकिन लापता होने की खबर मिलते ही दिल घबरा रहा था। तरह-तरह की बातें मन में आ रही थीं।

फोन आया और ढाई घंटे बाद हो गया हादसा

नंदकिशोर ने शाम 5 बजे ही मौसी सरजू बाई से मोबाइल पर बात की थी। सरजू ने बताया था कि उन्होंने गंगोत्री में स्नान कर लिया है और बुधवार को केदारनाथ के लिए रवाना होंगे, लेकिन ढाई घंटे बाद ही बस के खाई में गिरने की खबर आ गई।

ज्यादातर रिश्तेदार

बस हादसे में घायल और लापता होने वालों में ज्यादातर आपस में रिश्तेदार हैं। दरअसल, धार्मिक यात्रा पर जाने के लिए आपस में ही उन्होंने एक-दूसरे को राजी किया था। बेटमा के अलावा हातोद के कराड़िया गांव के भी कुछ यात्री हैं। जो बस खाई में गिरी, उसमें बेटमा के यात्री ज्यादा थे। जिसमें हातोद व दूसरे इलाकों के यात्री थे, वह बस पीछे चल रही थी।

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परिजन को घायलों की चिंता हादसे में घायल हुए यात्रियों की चिंता उनके परिजन को सताने लगी है कि सैकड़ों किलोमीटर दूर कौन उनका ख्याल रखेगा। रात को विधायक मनोज पटेल बेटमा पहुंचे तो उन्होंने कहा कि जो लोग घटनास्थल पर जाना चाहते हैं, उन्हें दिल्ली तक हम फ्लाइट से भेजने की व्यवस्था कर सकते हैं। उधर, हादसे में मृत लोगों के शव इंदौर तक पहुंचाने को लेकर भी लोगों ने विधायक से पूछा तो उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड सरकार से चर्चा की है और एक स्पेशल ट्रेन वहां से प्रदेश के लिए रवाना होगी।

घटना स्थल से मात्र एक किमी दूर थी होटल

नालूपानी में जिस जगह हादसा हुआ, वह तीर्थयात्रियों के पड़ाव से मात्र एक किमी दूर थी। यात्रियों के रुकने की व्यवस्था नालूपानी के ज्ञानदीप होटल में की गई थी। यहां इन्हें विश्राम कर शाम का भोजन लेना था। बुधवार सुबह यात्री केदारनाथ के लिए रवाना होने वाले थे। लेकिन होनी का कुछ और मंजूर था। पहली बस वालों को हादसे का तब पता चला जब वह होटल पहुंच गए।

 

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