अब विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम में शामिल होगी सेक्स एजुकेशन

लखनऊ. केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए सेक्स एजुकेशन को विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम में शामिल करने का फैसला किया है इस विषय को लेकर काफी दिनों से मंथन किया जा रहा था. लेकिन अंततः समय की जरूरत और सामाजिक एवं स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से उचित मानते हुए यौन शिक्षा देने का फैसला सरकार द्वारा किया गया। हालांकि अभी यह शिक्षा कक्षा 9 से बच्चों को दी जाएगी, बाद में इसे छोटे बच्चों के पाठ्यक्रम में लाने की भी योजना है।

sex education

आपको बता दें कि  जैसा कि अनेक चिकित्सकों जिनमें मनोचिकित्सक भी शामिल है का लंबे अरसे से मानना रहा था कि  सेक्स एजुकेशन बच्चों को अवश्य दी जानी चाहिए लेकिन भारतीय होने के कारण हम लोग इसे आसानी से स्वीकार नहीं कर सके  हालांकि अब यह फैसला हो गया है और इसकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा छत्तीसगढ़ के बीजापुर से आयुष्मान भारत कार्यक्रम के साथ ही की जाएगी।

 

अब यह आधिकारिक बात है. सेक्स एजुकेशन देश के स्कूलों के पाठ्यक्रम का हिस्सा बनने जा रहा है. इस कार्यक्रम की शुरुआत पीएम मोदी द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजना ‘आयुष्मान भारत’ के तहत ही शनिवार, 14 अप्रैल को छत्तीसगढ़ के बीजापुर से हुआ . अभी पहले चरण में कक्षा 9 से पढ़ाने की शुरुआत की जायेगी इसके बाद इसे छोटे बच्चों के पाठ्यक्रम में शामिल किया जायेगा.

स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत ‘रोल प्ले और एक्टिविटी बेस्ड’ मॉड्यूल को बाद में कई चरणों में पूरे देश के स्कूलों में लागू किया जाएगा और इसके लिए खासतौर से प्रशिक्षित शिक्षकों और साथी एजुकेटर (चुने हुए स्टूडेंट) की मदद ली जाएगी.

गौरतलब है कि इसके पहले यूपीए सरकार द्वारा भी इसी तरह का एक कार्यक्रम शुरू किया गया था, लेकिन साल 2005 में बीजेपी नेता वेंकैया नायडू की अध्यक्षता वाली राज्यसभा की समिति ने इसकी आलोचना की थी और इसे ‘चालाकी भरी मीठी भाषा बताया था, जिसका वास्तविक उद्देश्य स्कूलों में सेक्स शिक्षा देना और स्वच्छंदता को बढ़ावा देना है.’

इस पाठ्यक्रम में बढ़ते बच्चों के जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओें को शामिल किया जाएगा, जिनमें यौन और प्रजनन संबंधी स्वास्थ्य, यौन उत्पीड़न, गुड टच और बैड टच, पोषण, मानसिक स्वास्थ्य, यौन संबंधों से होने वाले रोग (STD), गैर संक्रामक रोग, चोट और हिंसा आदि शामिल होंगे. करीब 22 घंटे का यह कार्यक्रम केन्द्रीय स्वास्थय मंत्रालय और मानव संसाधन विकास मंत्रालय की संयुक्त पहल है और इससे करीब 26 करोड़ किशोरों को फायदा मिलेगा.

स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘यह निर्देश दिए गए हैं कि हफ्ते में एक पीरियड इस कार्यक्रम के लिए हो. इस मॉड्यूल में उपयुक्त तरीके से किशोरों से संबंधि‍त समस्याओं के बारे में बताया जाएगा.’

बीजपुर पूरे देश के 115 ‘आकांक्षी जिलों’ में शामिल हैं, जिनकी पहचान सरकार ने की है. इस कार्यक्रम के तहत सरकार जिलों में हर समय निगरानी के द्वारा विकास कार्य करती है. अधिकारी ने बताया, ‘पहले चरण में नौवीं से बारहवीं तक के स्टूडेंट्स पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा और बाद में इसमें छोटी क्लासेज के बच्चों को भी शामिल किया जाएगा.’ इसके लिए हर स्कूल के दो शिक्षकों का चयन कर उन्हें प्रशिक्षण दिया जाएगा.

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