अब बारिश में भी होगी प्याज की खेती, बढ़ेगी किसानों की आमदनी

भागलपुर। अब बारिश के मौसम में भी किसान प्याज की खेती करेंगे। खरीफ के मौसम में की जानेवाली इस खेती के लिए किसानों को नर्सरी तैयार करने की जरूरत नहीं होगी। यह खेती कंद से होगी। बारिश में दूसरे राज्यों से प्याज की आवक कम होने के कारण इसकी कीमत बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में प्याज की इस खेती से किसानों को बेहतर आय होगी।अब बारिश में भी होगी प्याज की खेती, बढ़ेगी किसानों की आमदनी

तीन वर्षों से इस तकनीक पर हो राह काम

कृषि विज्ञान केंद्र की उद्यान वैज्ञानिक डॉ. ममता कुमारी ने इस नयी तकनीक को किसानों तक पहुंचाने का काम तीन वर्ष पूर्व शुरू किया था। परिणाम भी बेहतर मिल रहे हैं। कई किसान भी प्याज की परंपरागत खेती छोड़कर खरीफ की खेती की ओर मुडऩे लगे हैं। उद्यान वैज्ञानिकों के अनुसार बारिश में नासिक से भी प्याज की आवक कम होती है। ऐसे में स्थानीय किसान बेहतर फायदा उठा सकते हैं।

आलू की तरह क्यारियों में होगी खेती

डॉ. ममता ने बताया कि खरीफ प्याज की खेती सपाट खेत के बजाय उठी हुईं क्यारियों में आलू की तरह कंद से की जाएगी। अब तक किसान परंपरागत तरीके से नर्सरी तैयार करते थे और यहां के पौधे खेतों में लगाते थे।

मई में तैयार होंगे कंद

जनवरी के अंत व फरवरी के प्रथम सप्ताह में किसान नर्सरी में पांच-पांच सेंटीमीटर की दूरी पर बीज डाल सकते हैं। मई के प्रथम सप्ताह में स्वस्थ कंदों का चयन कर किसान इसे डेढ़-दो सेंटीमीटर के जूट के बैग में भंडारित करेंगे। इन कंदों की रोपाई अगस्त के दूसरे सप्ताह में की जाएगी। नवंबर-दिसंबर में प्याज की फसल तैयार हो जाएगी।

इन किसानों ने शुरू की खेती

डॉ. ममता ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र के मार्गदर्शन में सुल्तानगंज प्रखंड के रन्नूचक निवासी मुरारी भूषण, कहलगांव अनुमंडल के नंदलालपुर के किसान ब्रह्मदेव सिंह व पुदिन यादव के अलावा आलमपुर के पीएन सिंह कंद से प्याज की खेती कर रहे हैं। इसका सकारात्मक परिणाम भी देखने को मिल रहा है। अन्य किसानों को भी इसकी खेती के लिए जागरूक किया जा रहा है।

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