अब इनोवेशन व उद्यमशीलता को स्कूलों से लेकर विश्वविद्यालय स्तर के पाठ्यक्रम में होगा शामिल

यूपी में स्टार्ट अप को बढ़ावा देने के लिए अब इनोवेशन व उद्यमशीलता को स्कूलों से लेकर विश्वविद्यालय स्तर के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। विद्यार्थी स्टार्ट अप दल बनाए जाएंगे और इस दल में शामिल प्रत्येक विद्यार्थी को 10 नंबर का ग्रेस (कृपांक) दिया जाएगा। विद्यार्थियों को उपस्थिति में भी 25 फीसद की छूट दी जाएगी। अभी 75 फीसद उपस्थिति शैक्षिक संस्थानों में अनिवार्य है, मगर स्टार्ट अप चुनने वालों के लिए 50 फीसद ही रहेगी।

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नई स्टार्ट अप नीति-2019 में इसका प्रस्ताव रखा गया है। उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने बताया कि नई स्टार्ट अप नीति-2019 को एक महीने के अंदर कैबिनेट से मंजूरी दिलाई जाएगी। पिछली स्टार्ट अप पॉलिसी 2016 व 2017 में सिर्फ सूचना प्रौद्योगिकी व इलेक्ट्रानिक्स विभाग ही शामिल था अब शिक्षा, स्वास्थ्य रक्षण, कृषि, खाद्य एवं प्रसंस्करण जैसे विभिन्न क्षेत्रों में नई तकनीक विकसित करने पर जोर दिया जाएगा और युवाओं को अपना रोजगार स्थापित करने में मदद दी जाएगी। प्रस्तावित नई नीति में स्कूली शिक्षा से स्टार्ट अप को जोड़ा गया है।

स्कूलों में विद्यार्थियों को नवाचार (इनोवेशन) व उद्यमशीलता का बुनियादी पाठ पढ़ाया जाएगा। वहीं विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों में नवाचार व उद्यमशीलता पर नए कोर्स शुरू किए जाएंगे। शिक्षकों के लिए विशेष फैकल्टी डवलपमेंट प्रोग्राम भी आयोजित किए जाएंगे। एक विद्यार्थी स्टार्ट अप दल में दो वर्ष के लिए पंजीकृत होगा। एक स्टार्ट अप अवधारणा पर काम करने वाले छात्र उद्यमियों को अपनी डिग्री पूर्णता हेतु अपनी स्टार्ट अप परियोजना को अंतिम वर्ष की परियोजना के रूप में बदलने की अनुमति भी दी जाएगी।

विद्यालय स्तर से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक विद्यार्थियों को अपना उद्यम स्थापित करने के लिए प्रेरित करने को ई प्रकोष्ठ स्थापित किए जाएंगे। सभी राज्य विश्वविद्यालयों को वन टाइम सहायता के रूप में दस लाख, प्रत्येक मंडल में हर वर्ष दो डिग्री कॉलेजों को पांच-पांच लाख और प्रत्येक जिलों के पांच स्कूलों को एक-एक लाख रुपये की धनराशि दी जाएगी। विद्यार्थियों को मानदेय भी दिया जाएगा।

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