अचानक बढ़ी पाकिस्‍तानी छुहारे की मांग, कीमत में आई उछाल…

‘पंछी, नदियां, पवन के झोंके कोई सरहद न इन्हें रोके..।’ फिल्म ‘रिफ्यूजी’ के लिए जावेद अख्तर के लिखे इस गीत के बोल कुछ और मायनों के साथ विस्तार ले रहे हैं। स्वाद भी सरहद की बंदिशों से परे है। तभी तो पुलवामा अटैक के बाद छुहारे पर 18 से बढ़ाकर 200% की गई कस्टम ड्यूटी का असर भी इसकी बिक्री और खपत पर नहीं दिख रहा है। गोरखपुर में हर महीने बिक रहा 40 टन पाकिस्तानी छुहारा इस बात की तस्दीक कर रहा है। जुबां पर चढ़े स्वाद ने रिश्तों की खटास भुला दी है।

14 फरवरी 2019 को हुए पुलवामा अटैक के बाद पाकिस्तानी उत्पादों के बहिष्कार को लेकर देश में माहौल बना था। विश्व व्यापार संगठन से बंधे होने के चलते भले इस पर प्रतिबंध नहीं लगा लेकिन पाकिस्तान से आने वाले अधिकतर उत्पादों पर कस्टम ड्यूटी को बढ़ाकर 200% कर दिया गया। पाकिस्तान से छुहारे के साथ ही लाहौरी सेंधा नमक भी बड़ी मात्रा में आयात होता है। कस्टम ड्यूटी दो सौ फीसदी होने के बाद भी कारोबार पर आंशिक असर ही पड़ा है। ड्राईफ्रूट के बड़े कारोबारी अनिल जायसवाल बताते हैं कि ‘पुलवामा अटैक के बाद ड्राई फ्रूट में सर्वाधिक असर छुहारे की कीमतों पर पड़ा। 60 से 120 रुपये प्रति किलो में बिकने वाला पाकिस्तानी छुहारा 160 से 250 रुपये तक पहुंच गया। इसके बाद भी गोरखपुर में पहले इसकी खपत 45 से 50 टन प्रति महीने थी तो अब भी 40 टन तक है।’

तस्करी पर अंकुश से कस्टम ड्यूटी देकर आ रहा छुहारा

कस्टम ड्यूटी बढ़ने से पाकिस्तान से छुहारे की तस्करी भी शुरू हो गई। कुछ कारोबारी इसे इराक के रास्ते मंगाने लगे। वहीं बड़ी मात्रा में छुहारा नेपाल के रास्ते तस्करी कर आने लगा। दो साल पहले महराजगंज के कोल्हुई में रोडवेज बस से तस्करी कर लाये जा रहे छुहारे को कस्टम ने बरामद किया था। कोरोना संक्रमण के बाद भारत-नेपाल बॉर्डर सील होने से तस्करी पर अंकुश लगा तो कस्टम ड्यूटी भर कर व्यापारी छुहारा मंगाने लगे। चैंबर ऑफ टेडर्स के महासचिव गोपाल जायसवाल बताते हैं कि ‘कस्टम ड्यूटी बढ़ने से पाकिस्तानी छुहारे की कीमतें भले ही दोगुने से अधिक हो गई हों लेकिन मांग पर कोई असर नहीं है।’

खजूर भी बना विकल्प
कारोबारियों के मुताबिक छुहारे का सस्ता विकल्प खजूर जरूर बना था लेकिन एक बार फिर पाकिस्तानी छुहारे ने मार्केट पर कब्जा जमा लिया है। खजूर ईरान के अलावा अधिकतर खाड़ी देशों से आता है। यह बाजार में 150 से 2000 रुपये प्रति किलो के भाव से उपलब्ध है। कोरोना काल में भी खजूर की अच्छी मांग रही।

लाहौरी सेंधा नमक की कीमतों में 600 फीसदी का उछाल

दुनिया में यह सेंधा नमक पाकिस्तान के सिंध में पाया जाता है। पुलवामा अटैक से पहले अच्छी क्वालिटी के सेंधा या लाहौरी नमक की कीमत 15 से 20 रुपये प्रति किलो थी। 200 फीसदी कस्टम ड्यूटी के बाद इम्पोर्ट कर आ रहे सेंधा नमक की कीमत 120 रुपये तक पहुंच गई है। किराना दुकानदार वीरेन्द्र मौर्या बताते हैं, ‘ आयुर्वेद की दवाओं में सेंधा नमक का उपयोग होता है। इसका सेवन व्रत में भी किया जाता है। पुलवामा अटैक के बाद सेंधा नमक की मांग काफी कम हो गई थी लेकिन कोरोना काल में आयुर्वेद के प्रति बढ़े भरोसे के बाद इसकी मांग में इजाफा हुआ है। कई अच्छी कंपनियां इसकी पैकेजिंग कर बिक्री कर रही हैं।’ इरानी सेंधा नमक इससे आधी से भी कम कीमत में उपलब्ध है लेकिन वह खट्टा तो होता ही है, सेहत के लिए भी नुकसानदेह माना जाता है इसलिए उसकी मांग काफी कम है।

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