अगर हरियाणा सरकार लाइसेंस जारी न करती तो मनु नहीं ला पाती मैडल

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हरियाणा की सोलह वर्षीय निशानेबाज़ मनु भाकर का नाम देश की सुर्खियां बन गया है। उन्होंने मैक्सिको में चल रहे इंटरनेशनल शूटिंग स्पॉर्ट्स फेडरेशन विश्वकप में दो गोल्ड मेडल जीतकर भारत का नाम रोशन कर दिया है। हालांकि एक समय ऐसा भी आया था जब मनु और उनके पिता को सरकारी अफसरशाही के निकम्मेपन के चलते बहुत परेशानी उठानी पड़ी थी। मनु भाकर को यदि हरियाणा सरकार का सहयोग नहीं मिला होता तो शायद वे मैक्सिको में जाकर भारत के लिए पदक नहीं ला पाती।

जब मनु इस प्रतियोगिता की तैयारी कर रही थीं तो उन्हें विदेश से एक गन मंगवाने के लिए पिस्टल लाईसेंस की जरूरत पड़ी थी, लेकिन झज्जर जिला प्रशासन ने उनके लाइसेंस के आवेदन को रद्द कर दिया था। मनु के पिता ने बताया है कि मुझे अपनी बेटी के लिए .22 बोर पिस्टल का लाइसेंस हासिल करने में दो महीने से ज्यादा का समय लग गया। अधिकारी लगातार लाइंसेंस की तारीख को आगे बढ़ा रहे थे और वे हमारी बात तक सुनने को ही तैयार नहीं होते थे।’ रामकृष्ण कहते हैं, ‘उस दौरान एशियन यूथ गेम्स शुरू होने को थे और मैं और मेरी बेटी अभी तक अपनी पिस्टल का लाइसेंस बनवाने के लिए ही धक्के खा रहे थे।’

समय तेज़ी से गुजर रहा था और मनु और उनके पिता की चिंताएं बढ़ती जा रही थी। इसके बाद मनु के पिता ने हरियाणा के शिक्षा मंत्री से मिले। शिक्षा मंत्री ने मामले की गंभीरता समझते हुए फौरन सरकार को सूचना दी। उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय और राज्य खेल मंत्री को ट्वीट कर इस बारे में तुरंत समाधान निकालने के लिए कहा। मनोहरलाल सरकार ने संज्ञान लेते हुए अड़चनों को दूर किया और एक सप्ताह में ही मनु को लाइसेंस जारी कर दिया।

जब से हरियाणा में भाजपा की सरकार बनी है, युवाओं में खेल के प्रति रुझान बढ़ा है। इसका कारण है कि जब प्रदेश का कोई खिलाड़ी अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर पदक लेकर आता है तो उसे करोड़ों में नगद राशि भेंट की जाती है। देश के किसी अन्य राज्य में खिलाडियों को इस तरह का आर्थिक प्रोत्साहन नहीं मिलता। मनु और उनके जैसे प्रतिभाशाली खिलाडियों के लिए यह सरकार अभिभावक की तरह कार्य कर रही है। यदि ऐसा न होता तो राज्य के खेलमंत्री मनु के लिए प्रयास नहीं करते।

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