अगर आप इन बीमारियों से हैं ग्रस्त तो भूलकर भी न पहनें पुखराज

ज्योतिषशास्त्र और रत्नशास्त्र का व्यक्ति के जीवन से बहुत ही गहरा संबंध होता हैं। व्यक्ति अगर सोच समझ या फिर किसी ज्योतिषी की सलाह लेकर रत्न को धारण नहीं करता हैं। वह अपने मन से किसी भी रत्न को अपनी इच्छा के मुताबिक अगर पहन लेता हैं।तो उस व्यक्ति के जीवन में कई सारी समस्या और परेशानियां आ सकती हैं। वही इतना ही नहीं वह शरीरिक रूप से भी बीमार हो सकता हैं वही व्यक्ति को रत्न धारण करने के लिए जन्मपत्री, हाथेली की रेखा,उसकी जरुरत व शारीरिक बीमारी का सही निरीक्षण बहुत ही जरूरी होता हैं।अगर आप इन बीमारियों से हैं ग्रस्त तो भूलकर भी न पहनें पुखराज

आपको बता दें,कि हर रत्न का सम्बन्ध किसी न किसी ज्योतिष ग्रह से जरूर होता हैं। वही रत्न को पहनने से उसके प्रति​नधि ग्रह की शक्ति व सम्बंधित खनिज की मात्रा व्यक्ति के शरीर में बढ़ जाती हैं। वही इसका व्यक्ति पर विपरीत प्रभाव भी पड़ सकता हैं।

वही अधिकतर ज्योतिषी या फिर रत्नों के विद्वान लड़की की शादी न होने, लड़का न होने पढ़ाई व गुरु गृह के लिए पुखराज रत्न को धारण करवा देता हैं। मगर आपको बता दें,कि अनेक बार पुखराज रत्न मनुष्य में अपेंडिक्स, हार्निया, मोटापा, पीलिया, आंत में इन्फेक्शन, गैस संबधित बीमारी व अहंकार में वृद्धि कर परिवारिक, सामाजिक रिश्तों में कड़वाहट लेकर आता हैं। इस लिए यह बहुत ही अवश्यक हैं। कि रत्न को धारण करने से पहले पंत्री अध्ययन जरूर कर लेना चाहिए। जिससे आप अपने लिए सही रत्न का चुनाव कर सकें।

वही पुखराज रत्न ब्रहस्पति गृह का रत्न होता हैं। वही कुंडली में गुरु गृह कमजोर होने पर पुखराज को धारण किया जाता हैं। वही अगर गुरु जन्मपत्री में छठे, आठवें और 12वे भावों का स्वामी हैं या नीच हैं,तो पुखराज धारण करने से परेशानी आ सकती हैं।

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